सूर्य(Surya) किसी व्यक्ति की कुंडली में बहुत महत्वपूर्ण ग्रह होता है क्योंकि सूर्य आत्मा का कारक है। बिना सूर्य के आपको जिंदगी में पद, प्रतिष्ठा, पिता का सुख नहीं मिल सकता। सूर्य हमारी हड्डियों, मस्तक, चेहरे पर तेज, आंखों, वाणी में आकर्षण, आत्मबल, अच्छा स्वास्थ्य और आयु को दिखाता है।यदि सूर्य अच्छा नहीं है तो आप कभी अच्छे राजनेता या उच्च पद पर आसीन नहीं हो सकते। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात है की सूर्य हमारे आत्मबल को दर्शाता है जिसका सूर्य अच्छा होता है उसका आत्मबल भी ज्यादा होता है।
Author: santwana
कैसे जाने अपना लग्नेश और ईष्ट देव-Lagnesh and Ishta Devta
ग्रह हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव डालते हैं। वैसे तो सभी नवग्रह हमारे जीवन पर कुछ न कुछ प्रभाव डालते हैं परन्तु हर किसी की कुंडली में एक ग्रह ऐसा होता है जो उस व्यक्ति के जीवन पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालता है वह ग्रह है हमारा लग्नेश।
यदि आपको अपना लग्नेश या मुख्य ग्रह पता हो तो आप अपना जीवन काफी बेहतर बना सकते हैं। किसी व्यक्ति का लग्नेश उस व्यक्ति के ऊपर सबसे ज्यादा प्रभाव डालने वाला ग्रह होता है।
Shivlinga Ke Prakar Aur Mahatava-शिवलिंग क्या है
Shivling kya hai-शिवलिंग क्या है
शिवलिंग
का अर्थ होता है – शिव का प्रतीक। शिवलिंग को सृष्टि के निर्माण का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग शिव जी का निराकार स्वरूप है। शिवलिंग के पूजन से भगवान महादेव की सगुण और निर्गुण दोनों प्रकार की भक्ति प्राप्त होती है। शिवलिंग का पूजन करने से शिव और शक्ति दोनों का पूजन हो जाता है।
प्रणव समस्त अभीष्ट वस्तुओं को देने वाला प्रथम लिंग है।वह सूक्ष्म प्रणव है। सूक्ष्म लिंग निष्कल होता है और स्थूल लिंग सकल। एक अक्षररूप जो ओम है उसे सूक्ष्म प्रणव जानना चाहिए और पंचाक्षर मंत्र नमः शिवाय को स्थूल लिंग कहते हैं।उन दोनों प्रकार के लिंगो का पूजन तप कहलाता है।
पृथ्वी के विकारभूत पांच प्रकार के लिंग ज्ञात हैं-पहला स्वयंभू लिंग, दूसरा बिंदु लिंग, तीसरा प्रतिष्ठित लिंग, चौथा चरलिंग और पांचवां गुरू लिंग।
Sawan Maas 2025 Ke Vrat Tyohar-सावन मास 2025 के व्रत और त्यौहार
वर्ष 2023 में सावन या श्रावण मास का आरम्भ 4 जुलाई से होगा। 18 जुलाई से 16 जुलाई तक अधिक श्रावण मास रहेगा तथा 31 जुलाई को श्रावण मास की समाप्ति होगी।
Navgrah Beej Mantra And Navgrah Gayitri Mantra -नवग्रह बीज मन्त्र द्वारा कैसे मजबूत करें अपना भाग्य
नवग्रहों(Navgrah) को मजबूत रखना अत्यंत आवश्यक है। खास कर जातक की कुंडली में जिस ग्रह महादशा या अंतर्दशा चल रही हो तथा लग्नेश(मुख्य ग्रह) व चंद्र राशि के स्वामी ग्रह को मजबूत रखना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इन ग्रहों का जातक के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हिन्दी अर्थ-Shri Ramchandra Kripalu Bhajman
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥
हे मन, कृपा करने वाले श्रीराम का भजन करो जो कष्टदायक जन्म-मरण के भय का नाश करने वाले हैं, जो नवीन कमल के समान आँखों वाले हैं, जिनका मुख कमल के समान है, जिनके हाथ कमल के समान हैं, जिनके चरण रक्तिम (लाल) आभा वाले कमल के समान हैं॥1॥
Shiv Tandav Stotram With Hindi Meaning – शिव तांडव स्तोत्र का हिंदी अर्थ
Shiv Tandav Stotram
जटाटवी गलज जल प्रवाह पावित स्थले
गलेडव लम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम।
डमड डमड डमड डमन निनाद वड डमवयं
चकार चण्ड ताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्।।1
Aarti Kya Hai Aur Aarti Ka Mahatva-आरती क्या है, महत्व, कब और कैसे करें आरती
आरती को “आरात्रिका” अथवा “आरार्तिक” और “नीराजन” भी कहते हैं। पूजा के अंत में आरती की जाती है। पूजन में जो त्रुटि रह जाती है ,आरती द्वारा उसकी पूर्ति होती है। स्कंद पुराण में कहा गया है –
“मन्त्रहीनं क्रियाहीनं यत् कृतं पूजनं हरे:।
सर्वं सम्पूर्णतामेति कृते नीराजने शिवे।।”
पूजन मंत्रहीन और क्रियाहीन होने पर भी नीराजन (आरती) कर लेने से उसमें सारी पूर्णता आ जाती है।
Budh Grah Ke Lakshan Aur Upay- बुध के शुभ-अशुभ लक्षण और उपाय
Budh Grah Ke Lakshan
बुध ग्रह के द्वारा ये जाना जा सकता है कि आपके द्वारा लिए गए निर्णय कितने सही होंगे। अच्छा बुध अच्छी एकाग्रता देता है। अच्छा बुध अच्छा गणित और भाषा का ज्ञान देता है। अच्छा बुध अच्छी वाणी देता है,अच्छी कम्युनिकेशन स्किल देता है। अच्छा बुध व्यक्ति को हाजिरजवाब बनाता है। अच्छे बुध वाले लोग स्पष्टता के साथ अपनी बात रख पाते हैं।
Rahu Ke Lakshan -लक्षणों द्वारा जाने अपनी कुंडली में राहु की स्थिति
ज्योतिष शास्त्र में राहु केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। राहु(Rahu)और केतु सूर्य और चन्द्रमा के परिक्रमा मार्ग के कटान से उत्पन्न हुए है। क्योंकि यह वास्तविक ग्रह नहीं हैं इसलिए इन्हें छाया ग्रह(मायावी )भी कहा जाता है। इन्हें पापी ग्रहों की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसा कहा जाता है शनिवत राहु कुंजवत केतु। तात्पर्य है राहु शनि की तरह और केतु मंगल की तरह व्यवहार करता है।












