विम्शोपक बल ग्रहों की शक्ति निकालने का तरीका है जिसमें ग्रहों की विभिन्न वर्गों में स्थिति में आधार पर 20 अंकों में से अंक प्रदान किए जाते हैं। जिस ग्रह को जितना अधिक अंक मिलता है वह उतना ही बली होता है।
Importance Of Shodash Varga Kundali-षोडश वर्ग कुंडली
षोडश वर्ग के अंतर्गत सोलह वर्ग कुंडलियां आती हैं-
1) राशि कुंडली(D-1) , 2)होरा(D-2), 3)द्रेष्काण(D-3), 4)चतुर्थांश(D-4), 5)सप्तमांश(D-7), 6)नवमांश(D-9), 7)दशमांश(D-10), 8)द्वादशांश(D-12), 9)षोडशांश(D-16), 10)त्रिशांश(D-30), 11)चतुर्विशांश(D-24), 12)सप्तविशांश(D-27), 13)त्रिंशदशांश(D-30), 14)खवेदांश/चत्वार्यांश(D-40) , 15)अक्षवेदांश/ पंच चत्वार्यांश(D-45), 16)षष्टियांश(D-60)
Sri Suktam With Hindi Meaning-श्री सूक्तम् हिन्दी अर्थ सहित
हरिः ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥1॥
स्वर्ण के समान आभा वाली, सुन्दर, स्वर्ण और रजत आभूषण से सुसज्जित, चन्द्रमा के समान स्वर्ण आभा वाली, हे जातवेदो (यग्न की वह पवित्र अग्नि जिसमें आहुति दी जाती है) मैं उन देवी लक्ष्मी का आवाहन करता हूँ।
Varg Kundali(Divisional Charts) Aur Unse Banne Wale Yoga-वर्ग कुंडली क्या होती है
यदि हमें किसी भाव और गहनता या सूक्ष्मता से अध्धयन करना हो तो वर्ग कुंडलियों को देखना चाहिए। जिस प्रकार से विभिन्न भाव जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते है उसी प्रकार से विभिन्न वर्ग कुंडलियां भी जीवन के किसी विशेष पहलु के बारे में और सूक्ष्मता से बताती हैं।जैसे नवांश कुंडली द्वारा जीवनसाथी का विचार किया जाता है।
Panchkosh Kya Hota Hai- पंचकोश क्या है
तीनों शरीर को पुनः 5 कोशों पंचकोश(panchkosh) में विभक्त किया गया है।
अन्नमय कोश
प्राणमय कोश
मनोमय कोश
विज्ञानमय कोश
आनन्दमय कोश
Janiye Kaise Hui Shiv Tandav Stotra Ki Rachna-जानिए शिव तांडव स्तोत्र की रचना कैसे हुई
Janiye Kaise Hui Shiv Tandav Stotra Ki Rachna
रावण भगवान शिव का अनन्य भक्त था। उसके मन में यह इच्छा थी की भगवान स्वयं उसके साथ आकर रहें और वह उनकी सेवा करें। इस बात को वह कई बार भगवान के सम्मुख रख भी चुका था। पर भगवान शिव उसे विनम्रता पूर्वक कई बार यह समझा चुके थे कि यह संभव नहीं है। परन्तु रावण बहुत हठी था। वह बार-बार इस बात का प्रयत्न करता रहता था की भगवान शिव उसके साथ लंका चलने को तैयार हो जाएं।
Sankata Nashan Ganesh Stotra With Hindi Meaning-संकटनाशन गणेश स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित
Sankata Nashan Ganesh Stotra
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्
भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुः कामार्थ सिद्धये ||1||
उन देवता को सिर झुकाकर नमस्कार है जो देवी गौरी(पार्वती) के पुत्र हैं ,जो विनायक(संकट को दूर करने वाले) हैं, …
Hanuman Bahuk-हनुमान बाहुक
Hanuman Bahuk
सिंधु-तरन, सिय-सोच-हरन, रबि-बाल-बरन तनु ।
भुज बिसाल, मूरति कराल कालहुको काल जनु ।।
गहन-दहन-निरदहन लंक निःसंक, बंक-भुव ।
जातुधान-बलवान-मान-मद-दवन पवनसुव ।।
कह तुलसिदास सेवत सुलभ सेवक हित सन्तत निकट ।
गुन-गनत, नमत, सुमिरत, जपत समन सकल-संकट-विकट ।।१।।
Hanuman Jayanti Wishes-हनुमान जन्मोत्सव पूजन विधि और शुभकामना सन्देश
हनुमान जी को कलयुग का देवता कहा जाता है। हनुमान जी का जन्मोत्सव चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था।
Bajrang Baan Path Vidhi Sahit-बजरंग बाण पाठ विधि सहित
Bajrang Baan
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
चौपाई
जय हनुमंत संत हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥













