“अपने दिमाग में कभी यह न सोचें कि केवल आपका विश्वास ही सच्चा है और बाकी सभी झूठे हैं। यह निश्चय जान लो कि निराकार ईश्वर भी सत्य है और साकार ईश्वर भी सत्य है। फिर जो भी विश्वास तुम्हें आकर्षित करे, उसे दृढ़ता से थामे रहो।”
-रामकृष्ण परमहंस
Bandau Guru Pad Padum Paraga Hindi Arth-बंदउँ गुरु पद पदुम परागा
बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रवि कर निकर ॥
मैं उन गुरु महाराज के चरणकमल की वंदना करता हूं, जो कृपा के समुद्र और नर रूप में श्री हरि ही हैं और जिनके वचन महामोह रूपी घने अंधकार का नाश करने के लिए सूर्य किरणों के समूह हैं॥
Surya Puja Ka Mahatava
भारतीय संस्कृति में सूर्य अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हमारे कई महत्वपूर्ण त्यौहार सूर्य के ऊपर आधारित हैं। जैसे मकर संक्रांति का पर्व सम्पूर्ण उत्तर भारत में अत्यंत हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं। मकर संक्रांति को ही भारत के अन्य हिस्सों जैसे तमिलनाडु में पोंगल; कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में संक्रांति ,बिहार के कुछ जिलों में यह पर्व ‘तिला संक्रांत’ कहा जाता है। मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहते हैं। उत्तर प्रदेश में इसे खिचड़ी भी कहा जाता है।
Vakri Graha|Grah Kab Vakri Hote Hai-वक्री ग्रह क्या होते हैं
जब कोई ग्रह अपनी सामान्य गति की दिशा से उल्टा चलता हुआ प्रतीत होता है तो उसे वक्री ग्रह कहते हैं। सूर्य और चन्द्रमा को छोड़ शेष सभी ग्रह वक्री होते हैं। राहु-केतु हमेशा वक्री होते हैं।
Guru Purnima 2023 Mahatva- गुरु पूर्णिमा का महत्व
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा भारतवर्ष की महान गुरु शिष्य परम्परा को समर्पित पर्व है। यह दिन गुरु और शिष्य दोनों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस दिन शिष्य अपने गुरु का पूजन और वंदन कर उनके द्वारा प्रदान किए ज्ञान के प्रति आभार प्रकट करते हैं।
Karaka Aur Karakatva- ज्योतिष शास्त्र में कारक और कारकत्व
ज्योतिष शास्त्र में किसी भाव के स्वामी की तरह ही उस भाव के कार्य को करने वाले या फल देने वाले ग्रह को उस भाव का कारक कहते हैं।
Rashi Swabhav Aur Lakshan- राशियों के स्वाभाव और लक्षण
Rashi
नक्षत्रों के समूह को राशि कहते हैं। आकाश में अनेक तारों के समूह दिखाई देते हैं। उन्ही तारों के समूह को हमारे ऋषियों ने आकाश में एक विशेष आकृति बनाते हुए देखा। उन्हीं आकृतियों के आधार पर ऋषियों ने राशियों का नामकरण किया। राशियों की संख्या 12 है।
Dashmansh Kundali (D-10 Chart)- दशमांश कुंडली
दशमांश कुंडली जातक की जन्म कुंडली के दशम भाव का विस्तार होता है। इसके द्वारा किसी जातक के कर्मों और करियर का निर्धारण किया जा सकता है। इस कुंडली का प्रयोग जातक की सामाजिक स्थिति, सम्पन्नता, शक्ति आदि जानने के लिए किया जाता है।
Dreshkan Kundali (D3) Ko Jane-द्रेष्काण कुंडली को जाने
द्रेष्काण्ड कुंडली अत्यंत मत्वपूर्ण वर्ग कुंडली है तथा इसे षड्वर्ग में स्थान प्राप्त है। इसका प्रयोग जातक का पराक्रम, भाई-बहनों का सुख देखने के लिए किया जाता है।
द्रेष्काण्ड तीसरे भाव का विस्तार होता है। तीसरा भाव छोटे भाई -बहन, कम्युनिकेशन, छोटी दूरी की यात्रा, लिखने, सुनने, हाथ, मित्रों, पराक्रम, साकारत्मक सोच, कठिन परिश्रम और साहस का होता है।
Navmansh Kundali(D-9) Kaise Banaye-नवमांश कुंडली कैसे बनाएं
नवमांश कुंडली में एक राशि के 9 भाग किए जाते हैं जिसके प्रत्येक भाग का मान 3°20′ का होता है। उसके प्रत्येक भाग को नवमांश कहते हैं तथा इस प्रकार से प्राप्त कुंडली को नवमांश कुंडली कहते हैं।













